Sunday, 16 June 2013

अमानत के गुमनाम दोस्त के नाम

मुझे मालूम है
तुम सच्चे दोस्त थे उसके,
चाहा था उसे जीने के लिए,
लड़े भी उसकी ज़िंदगी के लिए,
कितना चाहा होगा तुमने उसे,
कितना चाहा होगा उसने तुम्हें,
तुम दोनों ने कितना प्यार किया होगा,
कितने सपने रखे होंगे सिरहाने,
उन सबको हटाकर एक दिन
देखने का मन करता है,
जानने का मन करता है
बताने का मन करता है
इक दोस्त ऐसा भी होता है
चुपचाप अकेले में रोता है
जान पर खेल कर लड़ता है
तुम्हारी आँखों में वो मंज़र
दर्ज भी होगा और क़र्ज भी,
नहीं बचा सकने की पीड़ा,
तुम्हारी करवटों को कैसे कैसे,
काटती होगी रात भर,
तुम तो मुआवज़े के एलान से भी
कर दिए गए हो बाहर,
तुम तो इंसाफ़ की लड़ाई से भी
कर दिए गए हो बाहर,
तुम्हारा दर्द तुम्हीं में जज़्ब हो गया,
जैसे वो दफ़्न हो गई हमेशा के लिए,
हम सबकी नाकामियों में,
दोस्त,
मैं तुम्हारी दोस्ती को चूमना चाहता हूँ,
बाँहों में कस कर रोना चाहता हूँ,
दोस्त,
वो कितना तड़पेगी तुम्हारे लिए,
जन्नत या दोज़ख़ की दीवारों के पीछे,
जाने तुम उसे ढूँढा करोगे कहाँ कहाँ पर,
सिनेमा हाल की सीट पर,
मुनिरका के बस स्टाप पर,
तुमने जो प्यार खोया है,
तुमने जो दोस्ती पायी है,
मैं मिलना चाहता हूँ तुमसे,
तुम्हारी चाहत के बचे हिस्से में,
अपनी चाहत का इम्तिहान देना चाहता हूँ ।
(ये उस दोस्त के लिए है जो ग़ायब है हमारे
बीच होकर भी, जिसकी मोहब्बत अब लौट न
सकेगी कभी, इंसाफ़ की तमाम लड़ाइयाँ जीतने
के बाद भी)

LUV U DAD


4 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा महान है.!
6 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा सबकुछ जानते है.!
10 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा बहुत अच्छे
है,लेकिन गुस्सा जल्दी हो जाते है.!
13 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा बहुत अच्छे थे
जब मैँ छोटा था.!
14 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा बहुत तुनक
मिजाज के होते जा रहे है.!
16 वर्ष की आयु मेँ : पापा जमाने के साथ
नही चल पाते, बहुत पुराने ख्यालो के है.!
19 वर्ष की आयु मेँ : पापा लगभग सनकी होते
जा रहे है.!
20 वर्ष की आयु मेँ : हे भगवान अब
तो पापा को झेलना मुश्किल है, पता नही
मम्मी कैसे सहन कर लेती है.!
25 वर्ष की आयु मेँ : पापा तो मेरी हर बात
का विरोध करते है.!
30 वर्ष की आयु मेँ : मेरे
बच्चो को समझाना बहुत मुश्किल है, मैँ
तो पापा से बहुत डरता था.!
40 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा ने मुझे बडे
अनुशाशनिक तरीके से पाला, मुझे
भी पालना पडेगा अब.!
45 वर्ष की आयु मेँ : मैँ आश्चर्य चकित हु
कि कैसे मेरे पापा ने मुझे बडा किया होगा.?
50 वर्ष की आयु मेँ : जबकि मै
अपनी इकलोती औलाद की देखभाल भी ठीक
तरीके से नही कर पाता.!
55 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा बहुत दुरदर्शी थे,
वो हमारे भविष्य के बारे मेँ
काफी सोचते थे.!
60 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा उच्च कोटि के
इन्सान है,जबकि मेरा बेटा मुझे
सनकी समझता है.!
वाकई मेँ मेरे पापा बहुत महान थे.!
पापा महान है इस बात को पुरी तरह समझने के
लिए मुझको पुरे 56 साल लग गये.!
आशा है की आपको 56 साल नहीं लगेंगे |
.love you papa.

FOR U 2

Poetry heals the wounds inflicted by
reason.

FOR U

We don´t have our beliefs, the beliefs
have us
Most people do not see their beliefs.
Instead, their beliefs tell them what
they see.

Saturday, 15 June 2013

आप की नजरों ने समझा प्यार केकाबिल मुझ

आप की नज़रों ने समझा प्यार के काबिल मुझे
दिल की ऐ धड़कन ठहर जा, मिल गयी मंझील
मुझे
जी हमे मंजूर है, आप का ये फैसला
कह रही हैं हर नजर, बन्दा परवर शुक्रिया
हँस के अपनी जिन्दगी में, कर लिया शामिल
मुझे
आप की मंझील हूँ मैं, मेरी मंझील आप है
क्यों मैं तूफ़ान से डरू, मेरा साहिल आप है
कोई तूफानोंसे कह दे, मिल गया साहिल मुझे
पड गयी दिल पर मेरे, आप की परछईयाँ
हर तरफ बजने लगी, सेकड़ों शहनाईयां
दो जहां की आज खुशियाँ, हो गयी हासिल मुझ

ग़ज़ल मौसम और दिल्ली

जब से हम तबाह हो गए
तुम जहाँपनाह हो गए
हुस्न पर निखार आ गया
आइने स्याह हो गए
तुम जहाँपनाह हो गए
आँधियों की कुछ पता नहीं
हम भी दर्दे राह हो गए
तुम जहाँपनाह हो गए ।
दुश्मनों को चिट्ठियाँ लिखो
दोस्त ख़ैरख्वाह हो गए
दिल्ली का मौसम बदला हुआ है । मिज़ाज ए
शहर में हम नहीं हैं । जगजीत चित्रा की ग़ज़ल
बारिश की तरह सुन रहा हूँ । कितनी बार इस
ग़ज़ल पर लिखूँगा और सुनूँगा पता नहीं ।पर
मुश्किल से आठ दस पंक्तियों की इस ग़ज़ल
को ऐसे गाए जा रहे हैं ये दोनों कि आरी पर
ज़िंदगी कटती जा रही है । एक बार मौसम
बदल जाए लोग झूमने के इंतज़ार में बैठे रहते हैं
। हवा शायद यही ख़ूबसूरत है जो बारिश से
पहले आई है । कहीं से भीग कर आई है ।

Friday, 14 June 2013

कहने का मन करता है...

दिल की गिरह खोल दो,
चुप न बैठो कोई गीत गाओ
महफिल में अब कौन है अजनबी
तुम मेरे पास आओ....
मिलने दो अब दिल से दिल को
मिटने दो मजबूरियों को
शीशे में अपने डूबो दो
सब फ़ासलों दूरियों को
जब भी यह गाना सुनता हूँ थिरकने लगता हूँ । हिन्दी सिनेमा के गाने मेरी धमनियों में दौड़ते हैं। यही मेरी अहसासों की दुनिया हैं । दूसरे की रची हुई मगर मेरे लिए । इस गाने की संयमित रफ़्तार एक ऐसी दुनिया में ले
जाती है जहाँ शाम की हल्की सी हवा छू छू कर गुज़र रही है, हमारे क़दम किसी के साथ आगे
पीछे हो रहे हैं । दोनों एक दूसरे को ऐसे थामे हैं कि थिरकना लाज़िमी हो जाए । रौशनी उकसा रही है कि कह दो ।
मन की गाँठें खुलने लगे चुपचाप । कोई बुला ले अपने पास । बिठा ले और कहने के लिए सारा वक्त क़दमों में बिछा दे । क्या गाना है । अभी बजाइये । ग़ज़ब का गीत है यह । रवानगी ऐसी कि भागते दिल को कोई थाम न सके । मेरे मोबाइल में यह गाना हमेशा रहा । हम जैसे न कह पानों के लिए उकसाने वाला गीत । कहने का ऐसा बेतकल्लुफ़ माहौल यह गाना रचता है कि पूछिये मत । ग़ौर कीजिये इस पंक्ति पर ...

हम राह पूछे किसी से
न तुम अपनी मंज़िल बताओ
कल हमसे पूछेगा कोई
क्या हो गया था तुम्हें कल
कहाँ से आए हो और जाना कहा है ।
बस कहते रहो ।
तभी इस गाने के बाद एक और बजने
लगता है ।
आगे भी जाने न तू
पीछे भी जाने न तू
जो भी है
बस यही एक पल है
दोनों गानों को इसी क्रम में सुनियेगा ।

A lost hope

Fountains of lament burst through my desires for you.. Stood like the height of a pillar that you were, I could see your moving eyes ...